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अनिल जौहरी

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नई दिल्ली | शनिवार | 21 जून 2025

शुक्रवार, 20 जून से शुरू हुए लीड्स टेस्ट में भारत ने एक नए कप्तान के साथ मैदान में कदम रखा, लेकिन पहले ही दिन टीम इंडिया ने दिखा दिया कि चुनौती चाहे जितनी भी बड़ी हो, जज़्बा अगर मजबूत हो तो जीत की नींव रखी जा सकती है।

भारत ने पहले दिन के अंत तक 85 ओवरों में महज़ 3 विकेट खोकर 359 रन जड़ दिए और इंग्लैंड को उसके ही घर में बैकफुट पर धकेल दिया — वो भी तब, जब रोहित शर्मा, विराट कोहली और मोहम्मद शमी जैसे दिग्गज टीम में मौजूद नहीं थे।

युवा सलामी बल्लेबाज़ यशस्वी जायसवाल ने इंग्लैंड की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में धैर्य और आक्रामकता का संतुलन दिखाते हुए शतक जड़ा। उनके साथी केएल राहुल ने भी 42 रन बनाकर अच्छी शुरुआत दी और दोनों ने पहले विकेट के लिए (रिकॉर्ड) 91 रन जोड़े।

अपनी कप्तानी के पहले ही टेस्ट में शुभमन गिल ने 127 रन बनाकर जबरदस्त जिम्मेदारी दिखाई। उन्होंने यशस्वी के साथ तीसरे विकेट के लिए 129 रन की साझेदारी की और मैदान पर पूरी तरह हावी नज़र आए।

उपकप्तान ऋषभ पंत ने भी अर्धशतक (65*) लगाया और पहले दिन क्रीज पर डटे रहे, जिससे भारत की स्थिति और मज़बूत हो गयी।

इस टेस्ट सीरीज के लिए भारत ने एक युवा और अपेक्षाकृत कम अनुभवी टीम उतारी है, खासकर इंग्लैंड की सीम और स्विंग से भरी परिस्थितियों में जो और भी चनौतीपूर्ण हो जाते है । लेकिन पहले ही टेस्ट के पहले दिन से ही यह टीम आत्मविश्वास से भरी हुई दिखी। शुभमन गिल की कप्तानी, पंत की वापसी, और यशस्वी का प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य न सिर्फ सुरक्षित है, बल्कि आक्रामक भी है।

लीड्स की सीमिंग पिचें, इंग्लिश गर्मियों की ठंडी हवा, और घरेलू इंग्लैंड टीम — ये सभी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। लेकिन जिस तरह से युवा खिलाड़ियों ने मोर्चा संभाला है, उससे उम्मीद की जा सकती है कि यह सीरीज रोमांचक मोड़ लेगी।

इंग्लैंड भारतीय क्रिकेट के लिए हमेशा एक अलग तरह की चुनौती पेश करता है — ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण अफ्रीका से अलग — गर्मी की शुरुआत में ठंडा मौसम और सीमिंग पिचें, जो ऑस्ट्रेलिया की कठोर उछालभरी या भारत की धीमी समतल पिचों से बिल्कुल भिन्न हैं।

यह वास्तव में तकनीक की परीक्षा बन जाता है, जो कि टेस्ट क्रिकेट की बुनियादी मांग है — जैसा कि टी20 की तेज़ और धमाकेदार शैली से उलट। इसलिए आईपीएल और टी20 में प्रदर्शन का यहां कोई विशेष महत्व नहीं होना चाहिए और उसे मानदंड नहीं बनाना चाहिए।

इसके बाद आते हैं तीन तेज गेंदबाज़ — बुमराह और सिराज को लेकर कोई बहस नहीं है। तीसरे स्लॉट के लिए प्रसिद्ध कृष्णा और अर्शदीप सिंह में मुकाबला है, और मेरी राय में अर्शदीप को मौका मिलना चाहिए — वह बाएं हाथ के गेंदबाज़ होने के कारण विविधता लाते हैं और सीमिंग पिचों के लिए अधिक उपयुक्त हैं, जबकि लंबे कद वाले प्रसिद्ध कठिन पिचों पर बेहतर विकल्प हो सकते हैं।

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