पिछले कुछ वर्षों में उतार–चढ़ाव, कूटनीतिक तनाव और अनिश्चितताओं से गुज़रने के बाद भारत-कनाडा संबंधों में अब एक नई शुरुआत होती दिखाई दे रही है। आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग की ताज़ा रफ़्तार दोनों देशों के बीच भरोसे के पुनर्निमाण का संकेत दे रही है। जोहांसबर्ग में हुए जी20 शिखर सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मुलाक़ात ने इस नई दिशा को और स्पष्ट कर दिया।
उच्च स्तरीय संवाद की बहाली
दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने सहमति व्यक्त की कि द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने के लिए नियमित उच्च-स्तरीय संवाद आवश्यक है—चाहे वह राजनयिक स्तर पर हो, मंत्रीस्तरीय स्तर पर हो, या फिर व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के जरिए। प्रधानमंत्री कार्नी ने 2026 की शुरुआत में भारत की यात्रा के लिए प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण को औपचारिक रूप से स्वीकार किया। यह यात्रा दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है।
दोनों नेताओं ने यह भी स्वागत किया कि ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-इंडिया टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन (ACITI) साझेदारी को औपचारिक रूप से अपनाया जा चुका है। यह त्रिपक्षीय पहल न केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, परमाणु ऊर्जा और महत्वपूर्ण तकनीकों में नए अवसर बनाएगी, बल्कि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में विविधीकरण को भी गति देगी।
न्यू रोडमैप और बढ़ता सहयोग
जून 2025 में क्याननास्किस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई पिछली द्विपक्षीय भेंट और अक्टूबर 2025 में विदेश मंत्रियों द्वारा घोषित नए रोडमैप के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक ऊर्जा स्पष्ट है। मोदी और कार्नी ने व्यापार, निवेश, शिक्षा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, रक्षा तथा ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री कार्नी ने भारत में फरवरी 2026 में होने वाले एआई शिखर सम्मेलन के लिए भी पूर्ण समर्थन व्यक्त किया।
व्यापार में नया अध्याय: CEPA पर समझौता
13 नवम्बर 2025 को नई दिल्ली में हुई 7वीं मंत्रीस्तरीय व्यापार और निवेश वार्ता के आधार पर दोनों नेताओं ने एक महत्वाकांक्षी ‘व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते’ (CEPA) के लिए औपचारिक तौर पर वार्ता शुरू करने का निर्णय लिया। प्रस्तावित CEPA में वस्तुओं-सेवाओं का व्यापार, कृषि एवं एग्री-फूड, डिजिटल व्यापार, निवेश, गतिशीलता और सतत विकास जैसे क्षेत्र शामिल होंगे।
दोनों प्रधानमंत्रियों को विश्वास है कि CEPA लागू होने के बाद द्विपक्षीय व्यापार 2030 तक 70 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा—जो मौजूदा व्यापार का लगभग दोगुना है।
न्यूक्लियर सहयोग और राजनयिक उपस्थिति में विस्तार
भारत और कनाडा दशकों से नागरिक परमाणु ऊर्जा सहयोग में साझेदार रहे हैं। बैठक में दोनों पक्षों ने इस सहयोग को आगे बढ़ाने और दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौतों की दिशा में बढ़ने पर सहमति जताई।
अगस्त 2025 में दोनों देशों में उच्चायुक्तों की वापसी के बाद अब कांसुलर और राजनयिक स्टाफ बढ़ाने पर भी हामी भरी गई है, ताकि लोगों-से-लोगों के रिश्ते और सुगम वीज़ा-सेवाएं बेहतर ढंग से संचालित हो सकें।
कानून-प्रवर्तन सहयोग: विश्वास और सुरक्षा का नया आधार
बैठक में कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के बीच चल रही बातचीत का स्वागत करते हुए दोनों नेताओं ने आपसी सुरक्षा सहयोग बढ़ाने को प्राथमिकता दी। यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाल के वर्षों में ट्रांसनेशनल क्राइम, साइबर अपराध और संगठित आपराधिक नेटवर्क जैसे मुद्दे उभरकर सामने आए हैं।
ट्रांसनेशनल अपराध पर G7 की सख्त चेतावनी
इसी पृष्ठभूमि में ओटावा में आयोजित जी7 आंतरिक एवं सुरक्षा मंत्रियों की तीन-दिवसीय बैठक विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही, जिसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूके और अमेरिका ने बढ़ते अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्कों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।
कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी अनंदसंगरी ने कहा कि क्याननास्किस में हुई 2025 जी7 शिखर बैठक पर आधारित यह संवाद ट्रांसनेशनल और संगठित अपराध के विरुद्ध सामूहिक कार्रवाई को मजबूत करने का प्रयास है।
बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं—
• अवैध सिंथेटिक ड्रग्स की आपूर्ति शृंखलाओं को पहचानना और रोकना
• मानव तस्करी और अवैध प्रवासन पर नियंत्रण
• साइबर अपराध और डिजिटल स्पेस में बढ़ते हमलों से निपटना
• आतंकवादी एवं उग्रवादी ऑनलाइन कंटेंट का मुकाबला
• युवाओं में बढ़ती ऑनलाइन कट्टरता को रोकना
• विदेशी राज्य-समर्थित ट्रांसनेशनल दमन की पहचान और उससे निपटने के लिए समन्वित रणनीतियाँ
• बच्चों को ऑनलाइन यौन शोषण से सुरक्षित रखने के लिए वैश्विक तंत्र का निर्माण
बैठक के अंत में एक संयुक्त बयान जारी किया गया, जिसमें यह दोहराया गया कि “हर सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी अपने नागरिकों की सुरक्षा है, और साझा खतरों के खिलाफ साझेदारी ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।”
50 वर्ष की साझेदारी का नया मील का पत्थर
2025 में G7 अपनी पचासवीं वर्षगांठ मना रहा है। 1975 में फ्रांस में पहली बैठक से लेकर आज तक यह समूह वैश्विक शांति, आर्थिक स्थिरता और सतत विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच रहा है। इस वर्ष कनाडा G7 अध्यक्ष के रूप में कई मंत्रीस्तरीय बैठकों की मेजबानी कर रहा है, और ओटावा बैठक उसी श्रृंखला का हिस्सा थी।
समापन
भारत-कनाडा संबंधों में पिछले वर्षों के तनाव भले ही विचलित करने वाले रहे हों, परंतु अब स्थितियों में तेज़ी से सुधार दिख रहा है। व्यापार, तकनीक, रक्षा, शिक्षा, ऊर्जा और सुरक्षा—हर क्षेत्र में संवाद और सहयोग की नई राहें खुल रही हैं। दोनों देशों के नेताओं की हालिया चर्चाएँ यह संकेत देती हैं कि आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंध न केवल स्थिर होंगे, बल्कि वैश्विक विकास और सुरक्षा संरचना में भी अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाएंगे।
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