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अनिल जौहरी

नई दिल्ली | शनिवार | 6 दिसंबर 2025

“हम भगवान पर भरोसा करते हैं; बाकी सबको प्रमाण दिखाना पड़ता है।”
प्रमाणन और प्रत्यायन (accreditation) की दुनिया में यह कहावत खूब प्रचलित है।

पेशेवर ऑडिटरों के तौर पर हम गर्व से कहते हैं कि हम ‘वस्तुनिष्ठ प्रमाण’ (objective evidence) के आधार पर काम करते हैं—और यह बिल्कुल सही भी है। श्रेष्ठ ऑडिटर वही हैं जो निष्कर्ष प्रमाणों के आधार पर निकालते हैं, न कि अपनी व्यक्तिगत राय के आधार पर।

लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानकों में एक ऐसी आवश्यकता भी है जो केवल प्रमाण पर नहीं, बल्कि धारणा (Perception) पर भी आधारित होती है—और वह है निष्पक्षता (Impartiality)

प्रत्यायन और प्रमाणन (और वास्तव में, विनियमन/Regulation) की नींव इस बात पर टिकी होती है कि यह संस्थाएँ निष्पक्ष हों—और निष्पक्ष दिखें भी

निष्पक्षता का उदाहरण

मैं प्रशिक्षण के दौरान एक उदाहरण देता हूँ:
मान लीजिए मैं अपने बेटे की कंपनी—चाहे वह प्रमाणन संस्था हो, प्रयोगशाला हो या कोई विनिर्माण/सेवा कंपनी—का ISO 9001 के अनुसार ऑडिट करता हूँ। मैं पूरी व्यावसायिक ईमानदारी से ऑडिट करता हूँ, सभी गैर-अनुपालन लिखता हूँ, और रिपोर्ट स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा स्वीकार कर ली जाती है।

 

लेख एक नज़र में
यह लेख अंतरराष्ट्रीय मानकों में निष्पक्षता (Impartiality) और विशेष रूप से उसकी धारणा (Perception) के महत्व पर केंद्रित है। प्रमाणन और प्रत्यायन की दुनिया में केवल वस्तुनिष्ठ प्रमाण काफी नहीं होते, बल्कि संस्थाएँ निष्पक्ष दिखनी भी चाहिए।
लेखक उदाहरण देकर समझाते हैं कि भले ही ऑडिट पूरी ईमानदारी से किया गया हो, लेकिन यदि ऑडिटर अपने ही बेटे की कंपनी का ऑडिट करे, तो हित-संघर्ष के कारण निष्पक्षता की धारणा प्रभावित होगी। ISO 17000 श्रृंखला के कई मानक निष्पक्षता का उल्लेख तो करते हैं, लेकिन कई बार ये आवश्यकताएँ गैर-ऑडिटेबल रहती हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बनती है।
खासकर ISO 17029 में कंसल्टिंग और वेरिफिकेशन जैसी विरोधी गतिविधियों की अनुमति कार्बन मार्केट की निष्पक्षता को कमजोर कर सकती है। UNFCCC ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए कड़े नियम लागू किए हैं, जिनमें स्वतंत्रता, निष्पक्षता और हित-संघर्ष पर स्पष्ट प्रतिबंध शामिल हैं। लेखक आशा करते हैं कि भविष्य में ISO भी इसी तरह के कठोर मानक अपनाएगा।

 

तो क्या कोई समस्या है?
हाँ, क्योंकि अपने बेटे की कंपनी का ऑडिट करना हित-संघर्ष (conflict of interest) है, जो निष्पक्षता की धारणा को प्रभावित करता है।
क्या कोई प्रमाण है कि ऑडिट निष्पक्ष नहीं था?
नहीं।
लेकिन सार्वजनिक धारणा में यह स्वीकार्य नहीं होगा।

ISO मानकों में निष्पक्षता की धारणा

ISO 17000 श्रृंखला में निष्पक्षता को “वास्तविक या प्रतीत होने वाली निष्पक्षता” के रूप में शामिल किया गया है, लेकिन कई बार यह स्पष्ट नहीं होता।

ISO 17021-1 (मैनेजमेंट सिस्टम सर्टिफिकेशन बॉडीज़)

4.2.1 कहता है कि प्रमाणन संस्था का निष्पक्ष होना और निष्पक्ष दिखना दोनों जरूरी है।
4.8 में निष्पक्षता के “वास्तविक और अनुमानित जोखिम” शामिल किए गए हैं।
हालांकि इसे प्रिंसिपल मानकर गैर-ऑडिटेबल माना जा सकता है।

ISO 17065 (उत्पाद/प्रक्रिया प्रमाणन)

A.2.1 कहता है कि प्रमाणन संस्थाओं को निष्पक्ष और निष्पक्ष दिखना जरूरी है।
यह भी केवल सूचनात्मक परिशिष्ट (informative annex) में है।

ISO 17024 (Persons Certification Bodies)

इसी प्रकार निष्पक्षता की आवश्यकता बताई गई है—पर यह भी गैर-ऑडिटेबल है।

ISO 17029 (Validation & Verification Bodies)

यह भी वास्तविक और प्रतीत होने वाली निष्पक्षता दोनों को जोखिम तत्व में शामिल करता है।

लेकिन सभी मानकों का संदेश स्पष्ट है—ये संस्थाएँ निष्पक्ष भी हों और लोगों की नजर में निष्पक्ष भी लगें

निष्पक्षता को तीन स्तरों पर परखा जाता है:

  1. संबंधित/जुड़ी हुई संस्थाएँ
  2. संस्था के भीतर की गतिविधियाँ
  3. मालिकों या कर्मचारियों के व्यक्तिगत संबंध

उदाहरण:
यदि कोई प्रमाणन संस्था किसी कंसल्टिंग कंपनी के स्वामित्व में है—तो क्या यह निष्पक्ष लगेगा?
नहीं।
फिर भी ISO 17024 और 17029 में कई प्रकार की विरोधी गतिविधियों की अनुमति है।

ISO 17029 की गंभीर समस्या

5.3.9 कहता है कि कोई संस्था एक ही ग्राहक के लिए एक परियोजना पर सत्यापन और दूसरी पर कंसल्टिंग कर सकती है।
यह कार्बन मार्केट की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है।

UNFCCC का हस्तक्षेप (Article 6.4, Paris Agreement)

UNFCCC ने हाल ही में सत्यापन/वैधता संस्थाओं पर कठोर आवश्यकताएँ लागू की हैं:

  • निष्पक्षता की नई परिभाषा: वास्तविक और प्रतीत होने वाली निष्पक्षता
  • स्वतंत्रता (Independence) की अनिवार्यता
  • कंसल्टिंग, फाइनेंसिंग, ट्रेनिंग आदि पर स्पष्ट प्रतिबंध

इसका मतलब है कि VVB किसी भी प्रकार की GHG परियोजना से जुड़ी कंसल्टिंग/फाइनेंसिंग गतिविधि में शामिल नहीं हो सकते, न ही ऐसी संस्थाओं से जुड़े हो सकते हैं।

यह ISO मानकों से कहीं आगे की चिंता को दर्शाता है और कार्बन मार्केट में बड़े बदलाव ला सकता है।

निष्कर्ष

उम्मीद है कि विश्वभर के हितधारक—विशेषकर ISO—इन आवश्यकताओं पर ध्यान देंगे और भविष्य में प्रमाणन, निरीक्षण और प्रत्यायन से जुड़े मानकों में ऐसी ही स्पष्ट निष्पक्षता और स्वतंत्रता की आवश्यकताएँ शामिल करेंगे, जिससे इन प्रणालियों की विश्वसनीयता और मजबूत होगी।

(लेखक: पूर्व CEO, नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर सर्टिफिकेशन बॉडीज़; मानकीकरण के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ)

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