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आज का संस्करण

नई दिल्ली, 3 अप्रैल 2024

दूध पानी जैसी दोस्ती

अनूप श्रीवास्तव

A person with glasses and a blue shirt

Description automatically generated

रिश्तोंपानी ने दूध से मित्रता की और उसमे समा गया जब दूध ने पानी का समर्पण देखा तो उसने कहा मित्र तुमने अपने स्वरुप का त्याग कर मेरे स्वरुप को धारण किया है

 

अब मैं भी मित्रता निभाऊंगा और तुम्हे अपने मोल बिकवाऊंगा दूध बिकने के बाद जब उसे उबाला जाता है तब पानी कहता है

 

अब मेरी बारी है मै मित्रता निभाऊंगा और तुमसे पहले मै चला जाऊँगा दूध से पहले पानी उड़ता जाता है जब दूध मित्र को अलग होते देखता है तो उफन कर गिरता हैऔर आग को बुझाने लगता है, जब पानी की बूंदे उस पर छींट कर उसे अपने मित्र से मिलाया जाता है तब वह फिर शांत हो जाता है।

 

पर इस अगाध प्रेम में थोड़ी सी खटास निम्बू की दो चार बूँद डाल दी जाए तो दूध और पानी अलग हो जाते हैं थोड़ी सी मन की खटास अटूट प्रेम को भी मिटा सकती है। (शब्द 170)

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