अखिलेश त्रिपाठी
नई दिल्ली | शनिवार | 14 फरवरी 2026
उत्तर प्रदेश में नए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) अधिनियम के खिलाफ विरोध तेजी से बढ़ता जा रहा है। इस अधिनियम के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार—दोनों ने जनता का विश्वास खो दिया है और यदि आज चुनाव हो जाएं तो भाजपा सत्ता से बाहर हो जाएगी। उन्होंने यूजीसी कानून को भी त्रुटिपूर्ण बताया।
हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने यूजीसी अधिनियम 2026 – समानता विनियमन (इक्विटी रेगुलेशन) लागू किया है, जो 15 जनवरी 2026 से देशभर के सभी विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध कॉलेजों में प्रभावी हो गया है। इस अधिनियम के तहत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को स्पष्ट रूप से जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया है।
इस कानून के अनुसार प्रत्येक विश्वविद्यालय और कॉलेज में समान अवसर प्रकोष्ठ (इक्विटी समिति) का गठन अनिवार्य किया गया है, जो भेदभाव संबंधी शिकायतों की सुनवाई कर कार्रवाई करेगा। संस्थानों को शिकायत दर्ज कराने के लिए इक्विटी हेल्पलाइन, पोर्टल और ई-मेल प्रणाली भी स्थापित करनी होगी, जिसमें शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने का प्रावधान है। गंभीर मामलों में संस्थानों को तत्काल पुलिस को सूचना देना अनिवार्य होगा।
अधिनियम के अन्य प्रावधान:
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इस अधिनियम में झूठी शिकायतों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं है। इस कमी के कारण सामान्य वर्ग के छात्रों में यह भय व्याप्त है कि झूठे आरोपों के आधार पर उन्हें निष्कासन, कारावास और उनके शैक्षणिक व व्यावसायिक भविष्य के विनाश का सामना करना पड़ सकता है।
यह भी आशंका जताई जा रही है कि इस कानून का दुरुपयोग दुर्भावनापूर्ण ढंग से किया जा सकता है, जिसमें महिला छात्रों के खिलाफ भी झूठी शिकायतें दर्ज कर उन्हें परेशान किया जा सकता है, जिससे उनकी शिक्षा बाधित होगी। इन्हीं आशंकाओं को विरोध का प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है। जहां यूजीसी का दावा है कि यह कानून समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देगा, वहीं आलोचकों का तर्क है कि इससे विवाद और तनाव ही बढ़ेगा। उनका कहना है कि पहले से मौजूद एससी/एसटी अधिनियम के दुरुपयोग और उससे जुड़े व्यापक मुकदमों के उदाहरण सामने आ चुके हैं। इसलिए आशंका है कि नया कानून वास्तविक संरक्षण से अधिक दुरुपयोग को बढ़ावा देगा।
इस्तीफे में अलंकार अग्निहोत्री का बयान:
“भारत सरकार द्वारा जारी यूजीसी कानून से गहराई से आहत होकर मैं उत्तर प्रदेश प्रांतीय सिविल सेवा से इस्तीफा दे रहा हूं।
इक्विटी समिति का प्रावधान केवल सामान्य वर्ग के छात्रों के उत्पीड़न का माध्यम बनेगा।
यदि सामान्य वर्ग के छात्र अधिक अंक प्राप्त करेंगे, तो ईर्ष्या के कारण उनके खिलाफ शिकायतें की जाएंगी। इससे उनका करियर नष्ट होगा, शिक्षा और रोजगार से वंचित होना पड़ेगा, और वे अपराध की ओर भी धकेले जा सकते हैं।
अतः यूजीसी को यह अधिनियम तत्काल वापस लेना चाहिए।”
‘फूट डालो और राज करो’ की नीति
अग्निहोत्री ने आगे कहा:
“मोदी सरकार ने इस कानून के माध्यम से ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाई है। इससे शैक्षणिक वातावरण को नुकसान पहुंचेगा और छात्रों के बीच टकराव बढ़ेगा।
मैं ब्राह्मण सांसदों और विधायकों से अपील करता हूं कि वे इस्तीफा देकर सामान्य वर्ग के साथ खड़े हों, अन्यथा उन्हें माफ नहीं किया जाएगा।”
उन्होंने यह मांग भी की:
उत्तर प्रदेश में राजनीतिक उथल-पुथल
अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद उत्तर प्रदेश में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। सोशल मीडिया और बरेली में जमीनी स्तर पर उन्हें व्यापक समर्थन मिला। सरकार ने स्थिति संभालने के प्रयास किए। जिला मजिस्ट्रेट ने उनसे बातचीत की और कथित तौर पर उन्हें रोकने की कोशिश की, हालांकि बाद में उन्हें जाने की अनुमति दे दी गई।
बरेली के मेयर और भाजपा नेता डॉ. उमेश गौतम ने उनसे मुलाकात की और इस अधिनियम की आलोचना करते हुए कहा कि यह सामान्य वर्ग के लिए हानिकारक है और इसे वापस लिया जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश सरकार ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया, शमली जिले से संबद्ध किया और जांच के आदेश दिए। अधिकारियों का कहना है कि मामला उच्चतम राजनीतिक स्तर तक पहुंच चुका है और भाजपा को बड़े राजनीतिक नुकसान की आशंका है।
इस बीच यह चर्चा भी व्यापक है कि दिल्ली में इस अधिनियम की संभावित वापसी को लेकर बैठकें हुई हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि यह कानून राजनीतिक रूप से गलत आकलन का परिणाम था, जो अब सत्तारूढ़ दल के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। (डॉ. अखिलेश त्रिपाठी, राजनीति विज्ञान के विद्वान और 35 वर्षों से सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार व यूपी रिपोर्टर।)
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