स्वर्गीय वरिष्ठ पत्रकार वीरेन्द्र सेंगर की दो महत्त्वपूर्ण पुस्तकों — ‘आगे और आग है’ तथा ‘सच के सिवाय’ — का विमोचन कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, नई दिल्ली के डिप्टी स्पीकर हॉल में एक गरिमामय समारोह में किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री डॉ. सोमपाल शास्त्री ने की, जबकि वरिष्ठ साहित्यकार व विचारक प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे।
इस अवसर पर पत्रकारिता, साहित्य और समाजसेवा के अनेक प्रख्यात जनों ने सेंगर की स्मृतियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
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सच्चाई का पर्याय रहे वीरेन्द्र सेंगर
वक्ता प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा —
“वीरेन्द्र सेंगर सच्चाई का पर्याय हैं। उनकी खोजी पत्रकारिता ने न केवल मीडिया जगत में नई चर्चा शुरू की, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा दी।”
उन्होंने याद किया कि सेंगर की रिपोर्टिंग ने कई बार सत्ताओं को झकझोरा —
चाहे हाशिमपुरा नरसंहार, किसान आंदोलन, सुधा गोयल हत्याकांड या गुजरात दंगे हों — हर जगह सेंगर निर्भीक आवाज़ बने रहे।
“उनकी लेखनी में सच्चाई की आंच थी — हर पंक्ति बीते समय को जीवंत कर देती है। ये किताबें हर उस व्यक्ति को पढ़नी चाहिए जो सच से प्रेम करता है।”
सरलता और साहस का संगम
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. सोमपाल शास्त्री ने कहा —
“वीरेन्द्र सेंगर की सबसे बड़ी खूबी उनकी सरलता थी। वे हर चुनौती को मुस्कराकर स्वीकार करते थे।”
उन्होंने संस्मरण सुनाया कि जब सेंगर की अटल बिहारी वाजपेयी से पहली मुलाकात हुई, तो अटल जी ने पूछा — “आप मेरे बारे में क्या सोचते हैं?”
सेंगर ने मुस्कराते हुए कहा — “आप बहुत अच्छे इंसान हैं, पर सही पार्टी में नहीं हैं।”
पूरा हॉल ठहाकों और तालियों से गूंज उठा।
“वे खबर नहीं लिखते थे, सच्चाई की मशाल लेकर चलते थे।” — डॉ. शास्त्री
‘सच्चाई का आईना’ हैं उनकी किताबें
विभूति नारायण राय ने कहा —
“वीरेन्द्र सेंगर की किताबें केवल किताबें नहीं, सच्चाई का आईना हैं। इन्हें पढ़कर विश्वास होता है कि पत्रकारिता अब भी जीवित है।
उन्होंने कहा कि सेंगर ने पत्रकारिता को नौकरी नहीं, जिम्मेदारी माना।
“उन्होंने सिखाया कि अगर इरादा साफ हो तो पत्रकार सत्ता के सामने झुकने के बजाय उसे आईना दिखाता है।”
‘चौथी दुनिया’ के दिनों की यादें
कमर वाहिद नकवी ने कहा —
“वीरेन्द्र सेंगर आज हमारे बीच नहीं हैं, पर उनकी स्मृतियां सदैव जीवित रहेंगी। उन्होंने साबित किया कि पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, जनता के पक्ष में खड़े होने का नैतिक दायित्व है।”
प्रेरणा और ऊर्जा से भरी रचनाएं
संतोष भारतीय ने कहा —
“उनकी रचनाएं न केवल प्रेरणा देती हैं, बल्कि आगे बढ़ने की ताकत भी देती हैं। उनमें उस दौर की गंध है जब कलम बेखौफ थी।”
कार्यक्रम की झलक
मंच पर डॉ. सोमपाल शास्त्री, प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल, कमर वाहिद नकवी, विभूति नारायण राय और संतोष भारतीय उपस्थित थे।
सेंगर की पत्नी गीता सेंगर और पुत्री ऋतम्भरा सेंगर के साथ अनेक गणमान्य हस्तियां —
आलोक भारद्वाज, सुशील सिंह, अरविंद सिंह, पी.सी. मिश्रा, विमल शर्मा, रीता भदौरिया, सर्जना शर्मा, गोपाल शुक्ला, संजय, अनिल नेहरा, वीरेन्द्र मिश्र, रवि सिंह, विष्णु गुप्त आदि उपस्थित रहे।
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सच्चाई की विरासत
वीरेन्द्र सेंगर का पूरा जीवन इस विश्वास का प्रतीक रहा कि —
“पत्रकारिता केवल सत्ता से सवाल करने का माध्यम नहीं, समाज को आईना दिखाने की कला है।”
उनकी दोनों किताबें ‘आगे और आग है’ तथा ‘सच के सिवाय’ पत्रकारिता के मूल्यों और नैतिकता की पुनर्स्थापना का दस्तावेज हैं।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित जनों ने कहा —
“वीरेन्द्र सेंगर ने सिखाया कि सच कहना और सच पर डटे रहना ही पत्रकारिता का असली धर्म है।”
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