जन-आधारित राजनीति के सशक्त संदेश के रूप में बिहार डेमोक्रेटिक फोरम (BDF) ने 2025 विधानसभा चुनावों के लिए अपना “नागरिक घोषणा पत्र” जारी किया है। यह दस्तावेज़ बिहार को समानता, अवसर और पारदर्शी शासन वाले राज्य में रूपांतरित करने का एक महत्वाकांक्षी खाका पेश करता है।
पटना में आयोजित एक सादे समारोह में जारी यह घोषणा पत्र चुनाव से पहले सामने आए सबसे व्यापक वैकल्पिक नीति दस्तावेजों में से एक बताया जा रहा है। इसमें शिक्षा, रोजगार, महिला अधिकार, स्वास्थ्य, कृषि और सुशासन जैसे दस प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है — जो सामाजिक न्याय और सतत विकास की दृष्टि से जुड़े हैं।
BDF, जो नागरिक समाज समूहों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का एक साझा मंच है, का कहना है कि यह घोषणा पत्र राजनीतिक वादों के बजाय जन-आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति है। इसका उद्देश्य बिहार के वंचित समुदायों — दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, युवाओं और प्रवासी श्रमिकों — की आवाज़ को सामने लाना है, जिन्हें राज्य के विकास की मुख्यधारा से अब तक अलग रखा गया है।
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आर्थिक सशक्तिकरण और रोजगार प्राथमिकता पर
घोषणा पत्र की शुरुआत रोजगार और आजीविका पर गहन फोकस से होती है। इसमें अल्पसंख्यक रोजगार ऋण योजना को पुनर्जीवित करने की मांग की गई है — यह बिना ब्याज की माइक्रोफाइनेंस योजना होगी जिसे बिहार राज्य अल्पसंख्यक वित्त निगम के माध्यम से ₹500 करोड़ के वार्षिक बजट के साथ चलाया जाएगा, ताकि अल्पसंख्यकों और असंगठित कामगारों में उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा सके।
बेरोजगारी की गंभीर समस्या से निपटने के लिए BDF ने एप्रेंटिसशिप और स्किल वाउचर योजना का प्रस्ताव रखा है, जो MSME क्षेत्र से जुड़ी होगी और युवाओं को प्रशिक्षण व रोजगार से जोड़ेगी। गिग और असंगठित क्षेत्र की महिला श्रमिकों के लिए कार्यघंटों, सुरक्षा और उचित वेतन से संबंधित कानूनी सुरक्षा की मांग की गई है।
BDF के अनुसार, “ये उपाय उन लाखों श्रमिकों के लिए सुरक्षा कवच बनाने की कोशिश हैं, जो बिना पहचान और अधिकारों के बिहार की अर्थव्यवस्था को चलाते हैं।”
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शिक्षा और युवाओं को केंद्र में रखकर विकास
घोषणा पत्र का मुख्य आधार शिक्षा और युवा सशक्तिकरण है। इसमें शिक्षा अधिकार गारंटी की घोषणा की गई है, जिसके तहत बारहवीं कक्षा तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी, साथ ही विद्यालयी ढांचे और शिक्षण गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा।
BDF ने एक वर्ष के भीतर 2.5 लाख शिक्षकों की रिक्तियां भरने और हर प्रखंड में एक अंग्रेज़ी माध्यम मॉडल स्कूल खोलने का वादा किया है। अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यक छात्रों के लिए आवासीय विद्यालय, मदरसों का आधुनिकीकरण, और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में छात्रावास खोलना भी योजना का हिस्सा है।
वंचित समुदायों के छात्रों के लिए UPSC, BPSC, JEE और NEET जैसी परीक्षाओं की नि:शुल्क कोचिंग की व्यवस्था होगी। बारहवीं पास छात्रों को मुफ्त लैपटॉप और इंटरनेट दिया जाएगा, जबकि उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राओं को ₹1 लाख की छात्रवृत्ति मिलेगी।
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को ₹6 लाख की सीमा तक पुनर्गठित करने और प्रत्येक पंचायत व वार्ड में पुस्तकालय खोलने का वादा किया गया है, ताकि एक “ज्ञान-आधारित सामाजिक गतिशीलता तंत्र” विकसित किया जा सके।
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महिलाओं को परिवर्तन का केंद्र
घोषणा पत्र में महिलाओं को बिहार के परिवर्तन की धुरी बताया गया है। महिला स्वाभिमान योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों की महिला मुखिया को ₹1,000 मासिक सहायता देने का प्रस्ताव है।
सरकारी नौकरियों और स्थानीय शासन निकायों में 50% आरक्षण महिलाओं के लिए सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
महिला सुरक्षा और न्याय के लिए 100 महिला न्यायाधीशों की फास्ट-ट्रैक अदालतें गठित करने का सुझाव दिया गया है, ताकि लैंगिक हिंसा के मामलों का शीघ्र निपटारा हो सके।
स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की संख्या पाँच लाख तक बढ़ाने और उन्हें राज्य स्तरीय फंडिंग से सीधे जोड़ने का प्रस्ताव है।
विधवाओं, परित्यक्ता और अकेली महिलाओं के लिए छात्रावास, छात्रवृत्ति और आवास सहायता, तथा घरेलू या सांप्रदायिक हिंसा पीड़ितों के लिए कानूनी व आर्थिक सहयोग का भी प्रावधान है।
BDF का कहना है, “यह घोषणा पत्र महिलाओं को लाभार्थी नहीं, बल्कि निर्णयकर्ता और बिहार के विकास की अग्रदूत के रूप में देखता है।”
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सामाजिक न्याय और समानता का ढांचा
जाति और समुदाय आधारित समावेशन को इस घोषणा पत्र की राजनीतिक दृष्टि का केंद्र बताया गया है। BDF ने नवीन जातिगत जनगणना की मांग की है, जिससे नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं का वितरण समानता पर आधारित हो सके।
न्याय बजट ढांचा (Nyay Budget Framework) के तहत दलितों, अतिपिछड़ों और पसमांदा मुसलमानों के लिए अलग बजटीय प्रावधान रखने का प्रस्ताव है।
अल्पसंख्यक समुदायों के लिए अल्पसंख्यक केंद्रित जिलों (Minority Concentrated Districts) की घोषणा, भीड़ हिंसा की जांच के लिए अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व वाली विशेष जांच टीमों (SITs) का गठन, और वक्फ संशोधन विधेयक 2025 का विरोध शामिल है।
इसके साथ ही, कब्रिस्तानों और विरासत स्थलों की सुरक्षा, उर्दू को बढ़ावा, मदरसों का आधुनिकीकरण और पारंपरिक कारीगरों को सहायता का भी उल्लेख है।
भूमिहीन दलितों, आदिवासियों और मुसलमानों के लिए भूमि पुनर्वितरण आयोग बनाने की घोषणा की गई है, ताकि अधिशेष भूमि का पुनर्वितरण हो सके — यानी बिहार के लंबे समय से ठहरे भूमि सुधार एजेंडे को पुनर्जीवित किया जा सके।
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स्वच्छ शासन और स्मार्ट ढांचा
भ्रष्टाचार और अक्षमता पर सीधा प्रहार करते हुए, घोषणा पत्र में ₹10 लाख से ऊपर के सभी सरकारी ठेकों को ऑनलाइन सार्वजनिक करने और उनकी निगरानी के लिए नागरिकों की भागीदारी वाले स्वतंत्र एंटी-करप्शन वॉचडॉग के गठन की मांग की गई है।
पिछले एक दशक की ग्रामीण आधारभूत परियोजनाओं का थर्ड-पार्टी ऑडिट कराने का प्रस्ताव है।
शहरी विकास के क्षेत्र में “स्मार्ट गांव” की अवधारणा दी गई है — जहां डिजिटल कनेक्टिविटी, कचरा प्रबंधन और पाइप से जलापूर्ति होगी।
ग्रामीण आवास योजना प्लस के तहत 10 लाख नए घर दलित, मुस्लिम और अतिपिछड़ा वर्ग परिवारों को देने का वादा है। साथ ही, 2028 तक हर घर को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
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स्वास्थ्य और ग्रामीण कल्याण
स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार घोषित करते हुए, BDF ने सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाइयों और जांच सेवाओं का वादा किया है और तीन वर्षों में प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पूरी तरह से आधुनिक बनाने का लक्ष्य रखा है।
हर पंचायत को एक एंबुलेंस, और शहरी झुग्गियों में नए स्वास्थ्य क्लिनिक देने की योजना है।
महिलाओं के लिए महिला स्वास्थ्य कोष बनाया जाएगा, जो मासिक स्वच्छता, मातृ देखभाल और मोबाइल हेल्थ वैन जैसी सेवाओं को सहयोग देगा।
ग्रामीण क्षेत्र के लिए, घोषणा पत्र में प्रमुख फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी, छोटे किसानों के कर्ज माफी, और बटाईदारों की कानूनी मान्यता का प्रस्ताव है।
सिंचाई और डेयरी के लिए मुफ्त बिजली, कृषि-आधारित उद्योगों को सहयोग, और डेयरी किसानों के लिए सब्सिडी शामिल है।
प्रवासी मजदूरों के लिए माइग्रेंट वर्कर वेलफेयर फंड का गठन होगा, जो ऑफ-सीजन के दौरान ₹5,000 मासिक सहायता देगा।
50 किसान शहरी बाजार कोल्ड स्टोरेज के साथ बनाए जाएंगे ताकि किसान सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ सकें।
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लोकतंत्र, संस्कृति और पहचान
शासन सुधार के तहत पंचायत राज संस्थाओं को सशक्त करने, सूचना के अधिकार (RTI) के विस्तार, और पुलिस व न्यायिक सुधारों की मांग की गई है ताकि हिरासत में यातना जैसी प्रथाएं समाप्त हों।
पत्रकारों — विशेषकर स्वतंत्र पत्रकारों — को सरकारी पहचान पत्र और कानूनी संरक्षण देने का प्रस्ताव है।
संस्कृति के क्षेत्र में घोषणा पत्र बिहार की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को सम्मान देने की बात करता है — स्कूलों और प्रशासन में भोजपुरी, मैथिली, मगही, अंगिका और उर्दू को बढ़ावा दिया जाएगा।
सांस्कृतिक केंद्र, युवा कला फैलोशिप, और विरासत-आधारित पर्यटन विकास कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं, जिनमें दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक इतिहास से जुड़े स्थलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
खेलों के क्षेत्र में, हर जिले में हॉकी, फुटबॉल और कुश्ती के लिए खेल परिसर और युवा छात्रावास बनाने और SC/ST, अल्पसंख्यक तथा महिला खिलाड़ियों के लिए फैलोशिप देने का वादा किया गया है।
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एक नए बिहार के लिए जन घोषणा पत्र
यह “नागरिक घोषणा पत्र” मात्र एक राजनीतिक दस्तावेज नहीं, बल्कि न्याय, गरिमा और अवसर का जन-घोषणापत्र है। यह जवाबदेह शासन और समान विकास की बढ़ती मांग को दर्शाता है।
आर्थिक समावेशन, सामाजिक सुधार और नागरिक जवाबदेही को जोड़ते हुए, यह घोषणा पत्र एक ऐसे बिहार की परिकल्पना करता है जो अपने ज्ञान, श्रम और सांस्कृतिक गौरव की ऐतिहासिक परंपरा को फिर से प्राप्त कर सके।
BDF के अनुसार, “बिहार को सिर्फ वादों की नहीं, बल्कि नागरिकों और राज्य के बीच विश्वास, न्याय और अवसर की साझेदारी की जरूरत है।”
(सैयद खलीक अहमद वरिष्ठ पत्रकार और अल्पसंख्यक अधिकारों के समर्थक हैं। वे इंडिया टुमॉरो के संपादक हैं।)
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