image

नीतिश कुमार का मरीन ड्राइव 

लेखक कमलेश राजू

प्रकाशक डायमंड पाकेट बुक्स 

पृष्ठ 152

कीमत Rs 200

**************

(लेखक का परिचय 

किसी व्यक्ति विशेष पर, वो भी राजनीतिक वो भी समकालीन, एक किताब लिखना अत्यंत जोखिम भरा काम है।

और अगर लेखक अमलेश राजू जैसा हो जो जनसत्ता जैसे एक अत्यंत जागरूक और ईमानदार अखबार से सम्बन्ध रखता हो तो उससे उम्मीदें बहुत बढ़ जाती हैं। अमलेश पिछले तीन दशकों से केवल वरिष्ठ संवाददाता नहीं हैं वे एक विचारक भी हैं जो महात्मा गांधी के विचारों पर भी उतनी ही स्पष्टता से लिखते और बोलते हैं जितना पत्रकारिता पर भारतीय जन संचार संस्थान और गुरु गोविंद सिंह विश्वविद्यालय में पत्रकारिता सिखाते हैं।

ये उनकी पांचवीं पुस्तक है।)

**************

ज के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में नीतिश कुमार की सफलता और उनके रिकॉर्ड को केवल अवसरवादिता कहना मूर्खता होगी। जिस व्यक्ति की बिहार की राजनीति मे शुरुआत जेपी, जार्ज फर्नांडिस, कर्पूरी ठाकुर और लालू प्रसाद यादव जैसे जन नायकों के साथ हुई वो अगर आज एन डी ए के समर्थन से दसवीं बार मुख्यमंत्री बना हुआ है तो इसे केवल उसकी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा कहना न केवल उसके साथ अन्याय होगा बल्कि नासमझी होगी।

लेखक ने बिहार में मरीन ड्राइव की योजना को कार्यान्वित करने के ज़रिए न केवल एक ईमानदार मुख्यमंत्री की जनकल्याणकारी योजनाओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है बल्कि मौजूदा राजनेताओं को सफलता का एक जीता जागता नमूना पेश किया है बल्कि इस मांडल को भविष्य में रिसर्च का एक विषय दे दिया है।

पुस्तक में लेखक ने बताया है कैसे बीस वर्षों के अपने कार्यकाल में नीतिश कुमार ने महिलाओं और बच्चों के लिए अपनी जन कल्याणकारी योजनाओं से अपनी ज़मीन इतनी मजबूत कर ली है कि पिछले चुनाव में भाजपा से कम सीटें आने के बावजूद बिहार किसी और को मुख्यमंत्री के रोल में देख ही नहीं सकता।

लेखक के अनुसार बिहार का मरीन ड्राइव आज बिहार के सम्मान और उसके निवासियों की अस्मिता का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने उदाहरणों सहित यह बताने का प्रयास किया है जो लोग कभी बिहार छोड़ कर दूसरे शहरों में बस गये थे आज बिहार वापसी के लिए तैयार हैं जहां ‘जंगल राज’ खत्म हो चुका है।

ये सब कुछ राजनीतिक कमेंट ऐसा लगता है और है भी!

लेकिन मानना पड़ेगा लेखक ने अपनी पुस्तक में न केवल नीतिश कुमार और उनके समर्थकों के वक्तव्यों को प्रमुखता दी है बल्कि दुनिया भर के प्रमुख अखबारों और पत्रकारों के माध्यम से उनके खिलाफ आने वाली आलोचनाओं को भी उतनी ही प्रमुखता से प्रकाशित किया है।

ये पाठकों पर निर्भर करता है वो किस पक्ष का विश्वास करते हैं और अच्छी पत्रकारिता की यही सबसे बड़ी कसौटी है जिसपर कमलेश पूरी तरह खरे उतरते हैं।

**************

  • Share: