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जगदीश गौतम

नई दिल्ली | शनिवार | 8 नवंबर 2025

चीन ने दुनिया को चौंका दिया है — उसने पहला ऐसा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित अस्पताल खोला है जहाँ कोई मानव डॉक्टर कार्यरत नहीं है। यह अस्पताल दावा करता है कि वह प्रतिदिन 10,000 मरीजों का इलाज कर सकता है — और यह सब उन एआई डॉक्टरों के जरिये होता है जो न सोते हैं, न थकते हैं, न अवकाश लेते हैं।

विशेषज्ञ इसे “मानव चिकित्सा का अंत” कह रहे हैं — स्वास्थ्य सेवाओं में वह मोड़, जब तकनीक ने इंसानी डॉक्टरों की जगह लेना शुरू कर दिया है। यह एआई अस्पताल एक आभासी पारिस्थितिकी तंत्र में संचालित होता है, जो स्वयं सीखने और विकसित होने की क्षमता रखता है, और ChatGPT जैसे बड़े भाषा मॉडलों पर आधारित है।

यह कोई प्रयोगशाला सिमुलेशन नहीं बल्कि पूर्णत: कार्यशील डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली है। चीन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा “डिजिटल डॉक्टर” तैयार किया है जो निदान, दवा और फॉलो-अप देखभाल में सक्षम है। विशेषज्ञों के अनुसार, बीजिंग का लक्ष्य केवल नवाचार नहीं बल्कि वैश्विक मेडिकल टेक्नोलॉजी में नेतृत्व स्थापित करना है।

यह पहल चीन की एआई, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर तकनीक में तेजी से बढ़ती ताकत का अगला चरण मानी जा रही है।

“एजेंट हॉस्पिटल” नामक इस संस्थान में कोई मानव डॉक्टर या नर्स नहीं है। यहाँ लगभग 40 एआई चिकित्सक कार्यरत हैं, जिन्हें डॉक्टर, नर्स या मेडिकल छात्र जैसी भूमिकाओं के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

मरीज आते ही पहचान पत्र स्कैन करता है और सिस्टम उसका पूरा मेडिकल इतिहास जुटा लेता है। कुछ ही सेकंड में एआई डॉक्टर डेटा का विश्लेषण कर निदान और उपचार तय करता है — जो मानव डॉक्टरों को घंटों लग सकते हैं।

यह प्रणाली एक साथ 10,000–20,000 मरीज संभाल सकती है। परीक्षणों में इन एआई डॉक्टरों ने मानकीकृत परीक्षाओं में 93% से अधिक अंक पाए — जो मानव मेडिकल छात्रों से बेहतर हैं। वे न थकते हैं, न भूलते हैं, न ही पक्षपात या रिश्वत जैसी मानवीय कमियों से ग्रस्त हैं।

मरीजों के लिए यह तेज़, सटीक और सस्ता इलाज है। पर डॉक्टरों के लिए यह खतरे की घंटी है। “कृत्रिम बुद्धिमत्ता पहले ही लाखों नौकरियाँ खत्म कर चुकी है, अब यह डॉक्टरों की बारी है,” रिपोर्ट कहती है। चीन में पहले से कुछ अदालतों में एआई न्यायाधीश काम कर रहे हैं — अब चिकित्सा क्षेत्र भी उसी राह पर है।

यह अस्पताल केवल तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि चीन का रणनीतिक संदेश भी है — कि वह अब नकल नहीं, नवाचार का अगुआ है। यदि “एजेंट हॉस्पिटल” मॉडल सफल रहा, तो यह पूरी दुनिया की स्वास्थ्य प्रणाली को बदल सकता है।

पर सवाल भी गंभीर हैं — क्या सहानुभूति को प्रोग्राम किया जा सकता है? क्या मशीनों को जीवन-मृत्यु के निर्णय लेने चाहिए?

फिलहाल इतना तय है कि एआई डॉक्टरों का युग शुरू हो चुका है — और चिकित्सा जगत अब पहले जैसा नहीं रहेगा।

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